अगर आप जीविका दीदी हैं और अपनी पंचायत में सुधा का बिक्री केंद्र खोलने के बारे में सोच रही हैं, तो Bihar Jeevika Sudha Vikri Kendra Yojana की जानकारी एक बार नए सिरे से पढ़ लीजिए। इस योजना पर इंटरनेट की ज़्यादातर पोस्ट जुलाई में लिखी गई थीं, जब गाइडलाइन आई थी और आवेदन शुरू हुए थे। तीन महीने में बात काफ़ी आगे बढ़ चुकी है। कुछ जिलों में दीदियों का चयन हो चुका है और अक्टूबर की शुरुआत तक राज्य में 44 केंद्रों का उद्घाटन भी हो गया है।
इस पोस्ट के लिए हमने प्रभात खबर, यूनीवार्ता और खबरफास्ट की खबरों के साथ दूसरी रिपोर्ट्स को मिलाकर देखा है। जो बात कई जगह एक जैसी मिली, वही यहाँ पक्की मानकर लिखी है। जहाँ जानकारी अधूरी थी या अलग-अलग मिली, वहाँ साफ़ लिख दिया है कि पक्का पता नहीं। आखिरी अपडेट: 16 अक्टूबर 2026।
जीविका सुधा बिक्री केंद्र योजना एक नज़र में
| योजना का नाम | जीविका-सुधा बिक्री केंद्र (JSBK) |
| किस योजना के तहत | मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना |
| कौन चला रहा है | जीविका (BRLPS) और COMFED (सुधा) |
| कितने केंद्र | 8,053, यानी हर ग्राम पंचायत में एक |
| कुल लागत | ₹75,000 |
| सरकारी अनुदान | ₹60,000 |
| दीदी का अपना हिस्सा | ₹15,000 |
| चयन का तरीका | सत्यापन के बाद प्रखंड स्तर पर ऑनलाइन लॉटरी |
| कौन आवेदन कर सकती है | MMRY से जुड़े जीविका समूह की सक्रिय महिला सदस्य |
Bihar Jeevika Sudha Vikri Kendra Yojana क्या है?
सुधा बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन यानी COMFED का डेयरी ब्रांड है। योजना का सीधा मतलब यह है कि हर ग्राम पंचायत में सुधा का एक अधिकृत बिक्री केंद्र खुलेगा और उसे जीविका की एक दीदी चलाएंगी। कई जगह इसे जीविका सुधा बिक्री केंद्र, Sudha Bikri Kendra या JSBK भी लिखा जाता है, सब एक ही योजना है।
यह मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से जुड़ी पहल है और खबरों में इसे सात निश्चय-3 के तहत बताया गया है। केंद्र पर सुधा का दूध, दही, पनीर, घी, लस्सी जैसे उत्पाद मिलेंगे। लक्ष्य 8,053 पंचायतों का है।
₹60,000 कैसे मिलेगा और ₹75,000 कहाँ लगेगा?
एक केंद्र की कुल लागत ₹75,000 तय की गई है। इसमें ₹60,000 सरकार अनुदान के रूप में देगी और बाकी ₹15,000 दीदी को अपनी तरफ़ से लगाने होंगे। यानी पूरा पैसा मुफ़्त नहीं है, अपना हिस्सा पहले से सोचकर रखना पड़ेगा।
कुछ रिपोर्ट्स में लिखा है कि इसी रकम में डीप फ्रीज़र, विज़ी-कूलर, ब्रांडिंग और शुरुआती स्टॉक आ जाता है। हमारे पास आधिकारिक गाइडलाइन की कॉपी नहीं है, इसलिए यह पक्का नहीं कह सकते कि पैसा सीधे बैंक खाते में आता है या सामान के रूप में मिलता है। इसका जवाब अपने प्रखंड परियोजना प्रबंधक (BPM) या CLF से लेना सबसे ठीक रहेगा। MMRY की किस्तों को लेकर उलझन हो तो हमारी यह पोस्ट भी देख सकती हैं: बिहार महिला रोजगार योजना किस्त कब मिलेगी।
कौन आवेदन कर सकती है?
- बिहार की निवासी महिला हों।
- जीविका के स्वयं सहायता समूह (SHG) की सक्रिय सदस्य हों।
- मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से लाभान्वित हों। मधुबनी की एक रिपोर्ट में यह शर्त साफ़ लिखी है।
- केंद्र खोलने लायक जगह हो। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक जगह किराये की हो तो वैध रेंट एग्रीमेंट चाहिए।
यानी हर जीविका दीदी इसके लिए पात्र नहीं है। समूह में नाम होना काफ़ी नहीं, MMRY का लाभ मिला होना भी ज़रूरी बताया गया है। अपना भुगतान देखना हो तो Bihar Jeevika Payment List 2026 वाली पोस्ट में तरीका लिखा है।
केंद्र के लिए क्या-क्या सामान मिलता है और क्या बिकेगा?
योजना का आधार जीविका (BRLPS) का 6 जुलाई 2026 का कार्यालय आदेश (संख्या 1130) बताया गया है। योर स्टोरी की रिपोर्ट के मुताबिक चुनी गई दीदी को केंद्र खोलने के लिए अधिकतम ₹60,000 की सहायता मिलती है, जिसका इस्तेमाल डीप फ्रीज़र, विज़ी कूलर, ब्रांडिंग, दुकान की तैयारी और उत्पाद खरीदने जैसे कामों में हो सकता है। दीदी के ₹15,000 वर्किंग कैपिटल के तौर पर लगेंगे।
दृष्टि IAS की रिपोर्ट में सामान की सूची थोड़ी और साफ़ है: 300 लीटर का डीप फ्रीज़र, विज़ी कूलर, सनबोर्ड, एप्रन और टोपी। केंद्र पर सुधा के दूध, दही, पनीर, घी, लस्सी और आइसक्रीम जैसे उत्पाद बिकने की बात कई रिपोर्ट्स में आई है।
दो बातें और। आदेश में केंद्र के लिए ऐसी जगह को प्राथमिकता देने की बात है जहाँ लोगों की आवाजाही अच्छी हो। और चुनी गई दीदियों को ट्रेनिंग देने का भी प्रावधान है, दृष्टि के अनुसार प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत ट्रेनिंग का प्रस्ताव है। यह ट्रेनिंग कब और कहाँ होगी, यह हमें पक्का नहीं मिला।
आवेदन से पहले कौन-से कागज़ तैयार रखें?
आधिकारिक दस्तावेज़ों की सूची हमें अभी नहीं मिली, इसलिए नीचे वही लिख रहे हैं जो कई वेबसाइटों पर एक जैसा बताया गया है। फ़ॉर्म भरने से पहले अपने BPM से मिलाकर देख लें।
- आधार कार्ड
- निवास प्रमाण पत्र
- आधार से जुड़ी बैंक पासबुक
- जीविका समूह की सदस्यता का प्रमाण (LoKoS ID)
- पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो
- दुकान की जगह के कागज़, या किराये की हो तो रेंट एग्रीमेंट
कुछ साइटें आय और जाति प्रमाण पत्र भी माँगने की बात लिखती हैं, पर इसकी पुष्टि हमें किसी भरोसेमंद रिपोर्ट में नहीं मिली।
चयन कैसे होता है? ज़्यादातर लोग यहीं उलझते हैं
आवेदन कर देने का मतलब केंद्र मिल जाना नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार प्रक्रिया इस क्रम में चलती है:
- दीदी आवेदन करती है।
- संबंधित CLF (संकुल स्तरीय संघ) तय मानकों पर पात्रता की जाँच करता है। कुछ खबरों में इसे भौतिक सत्यापन कहा गया है।
- सत्यापित दीदियों में से प्रखंड स्तर पर ऑनलाइन रैंडमाइज़्ड लॉटरी से चयन होता है।
- चुनी गई दीदियों को प्रखंड स्तर पर उद्यम चलाने और केंद्र के संचालन की ट्रेनिंग मिलती है।
- इसके बाद केंद्र शुरू होता है और उद्घाटन होता है।
लॉटरी का मतलब है कि आखिर में किस्मत की भी भूमिका रहेगी। अगर किसी पंचायत से पात्र आवेदन ज़्यादा आए तो नाम निकलना पक्का नहीं है। और लॉटरी में नाम न आए तो आगे दोबारा मौका मिलेगा या नहीं, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी हमें नहीं मिली।
आवेदन कैसे करें और अंतिम तारीख क्या है?
कई जगह आवेदन के लिए पोर्टल jsbk.brlps.in बताया गया है, और लिखा है कि आवेदन OTP, आधार और LoKoS ID से होता है। यह जानकारी हमें ज़्यादातर निजी वेबसाइटों पर मिली, इसलिए आवेदन से पहले अपने BPM या CLF से पूछ लें कि आपके प्रखंड में प्रक्रिया अभी खुली है या नहीं।
तारीख का मामला जिलों में अलग-अलग रहा है। पूर्वी चंपारण में आवेदन की आखिरी तारीख 19 जुलाई बताई गई थी। कई पोस्ट में अंतिम तारीख बाद में बताने की बात लिखी है। इसलिए कोई पोस्ट पूरे राज्य की एक पक्की तारीख बताए तो उस पर आँख मूँदकर भरोसा न करें। एक बात और, आवेदन के बदले किसी को पैसे देने का ज़िक्र हमें किसी रिपोर्ट में नहीं मिला। कोई माँगे तो सावधान हो जाइए।
अक्टूबर 2026 तक योजना कहाँ पहुँची है?
- भागलपुर में गोराडीह से पहले केंद्र की शुरुआत हुई। जिले की 200 से ज़्यादा पंचायतों में दीदियों का चयन हो चुका बताया गया है।
- अरवल के सोनभद्र बंशी सूर्यपुर प्रखंड की शेरपुर पंचायत में सुषमा देवी का केंद्र खुला। वे कमला स्वयं सहायता समूह से हैं और पहले किराना का काम करती थीं। उद्घाटन पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने किया।
- 8 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य भर में अब तक 44 केंद्रों का उद्घाटन हुआ है।
44 का आँकड़ा 8,053 के लक्ष्य के सामने बहुत छोटा है, करीब आधा प्रतिशत। इससे यही लगता है कि काम चरणों में चल रहा है। इसलिए अगर आपकी पंचायत में अभी कुछ नहीं हुआ है तो इसे अजीब मत समझिए।
कमाई कितनी होगी?
यहाँ सीधी बात लिखेंगे। हमें किसी भरोसेमंद रिपोर्ट में सुधा केंद्र चलाने वाली दीदी का आधिकारिक कमीशन या मुनाफ़ा नहीं मिला। जो पोस्ट महीने की कमाई का आँकड़ा देती हैं, उनमें यह नहीं बताया गया कि आँकड़ा आया कहाँ से, इसलिए हम कोई संख्या नहीं लिख रहे। कमीशन कितना है, यह COMFED या अपने जिले के जीविका कार्यालय से पूछिए।
सामान्य समझ से इतना ज़रूर कहा जा सकता है कि दुकान की जगह बहुत मायने रखती है। बाज़ार, चौराहे या स्कूल के पास का केंद्र ज़्यादा चलेगा। और फ्रीज़र बिजली पर चलता है, तो जहाँ बिजली बार-बार जाती हो वहाँ दही और पनीर जैसी चीज़ों के खराब होने का जोखिम रहेगा। यह हमारी अपनी समझ है, कोई सरकारी शर्त नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या ₹60,000 वापस करने होंगे?
ज़्यादातर रिपोर्ट्स में इसे अनुदान या वित्तीय सहायता कहा गया है, पर योर स्टोरी जैसे कुछ मीडिया संस्थानों ने इसे लोन लिखा है। चूँकि आधिकारिक आदेश की कॉपी हमारे पास पढ़ने लायक नहीं मिली, इसलिए पक्का जवाब BPM या जीविका कार्यालय से ही लें, ख़ासकर तब जब आप अपने ₹15,000 लगाने जा रही हों।
क्या सिर्फ़ जीविका दीदी ही आवेदन कर सकती हैं?
खबरों के हिसाब से हाँ। MMRY से जुड़े जीविका समूह की सक्रिय सदस्य ही पात्र बताई गई हैं।
एक पंचायत में कितने केंद्र खुलेंगे?
लक्ष्य हर ग्राम पंचायत में एक केंद्र का है।
चयन कैसे होगा?
पात्रता की जाँच के बाद प्रखंड स्तर पर ऑनलाइन लॉटरी से।
केंद्र पर क्या-क्या बिकेगा?
रिपोर्ट्स में सुधा के दूध, दही, पनीर, घी, लस्सी और आइसक्रीम जैसे उत्पादों का ज़िक्र है।
आवेदन के लिए कौन-से दस्तावेज़ चाहिए?
आधार, निवास प्रमाण पत्र, आधार से जुड़ी बैंक पासबुक, जीविका समूह की सदस्यता का प्रमाण, फ़ोटो और दुकान की जगह के कागज़ या रेंट एग्रीमेंट। पूरी सूची अपने BPM से मिला लें।
लॉटरी में नाम न आए तो क्या होगा?
इस पर हमें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली। प्रखंड कार्यालय से पूछना ही सही रहेगा।
ट्रेनिंग मिलेगी या नहीं?
चुनी गई दीदियों को ट्रेनिंग का प्रावधान बताया गया है। समय और जगह की पक्की जानकारी अभी नहीं मिली।
आखिर में एक सलाह
Bihar Jeevika Sudha Vikri Kendra Yojana कमाई का अच्छा मौका ज़रूर है, पर इसमें अपने ₹15,000 लगते हैं, जगह चाहिए और चयन लॉटरी से होता है। इसलिए हड़बड़ी में आवेदन करने से पहले अपने प्रखंड के जीविका कार्यालय में जाकर पक्का कर लें कि आपके यहाँ प्रक्रिया किस स्तर पर है।
अगर आपने आवेदन कर दिया है या आपकी पंचायत में चयन हो चुका है, तो कमेंट में अपने जिले का नाम और वहाँ का हाल बताइए, ताकि बाकी पाठकों को भी अंदाज़ा मिल सके। जीविका की ₹2 लाख वाली सहायता के बारे में जानना हो तो Jeevika 2 Lakh Loan Yojana वाली पोस्ट देख लें।

Amresh Singh
अमरेश सिंह एक कंटेंट राइटर हैं, इन्हें सरकारी योजनाओं और इससे जुड़ी जानकारियों पर काम करने का 5 वर्षों का अनुभव है। यह सभी जानकारी को सरल भाषा में लेख के रूप में लिखते हैं, ताकि आम लोगों को योजनाओं की सटीक जानकारी मिल सके। इनके द्वारा लिखे गए लेख लोगों को कल्याणकारी योजनाओं को समझने और उनसे लाभ उठाने में मदद करते हैं।
