बिहार बाढ़ राहत सहायता योजना स्टेटस चेक 2026: ₹7,000 आया या नहीं, ऐसे देखें

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इस साल गंगा, सोन, पुनपुन, गंडक और कोसी का पानी चढ़ा तो बिहार के कई जिलों में लोगों के घर-आँगन डूब गए। सरकार ने हर प्रभावित परिवार को ₹7,000 की मदद सीधे बैंक खाते में भेजने की बात कही थी, और पैसा दो चरणों में भेजा भी जा चुका है। अब गाँव-गाँव में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मेरे खाते में आया या नहीं?

इस पोस्ट में सब कुछ सीधी भाषा में है: योजना क्या है, अब तक कितना पैसा बँटा, स्टेटस कैसे देखें और अगर पैसा न आए तो किसके पास जाएँ।

बिहार बाढ़ राहत सहायता योजना क्या है

यह बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग की तरफ़ से बाढ़ पीड़ित परिवारों को दी जाने वाली तुरंत राहत है। पहले यह रकम ₹6,000 प्रति परिवार थी, बाद में इसे बढ़ाकर ₹7,000 कर दिया गया। पैसा हाथ में नकद नहीं मिलता, डीबीटी के ज़रिए सीधे बैंक खाते में आता है। यानी बीच में किसी को कमीशन या चाय-पानी देने की कोई ज़रूरत नहीं।

समाचार रिपोर्टों के मुताबिक़ इस बार पैसा उन परिवारों के खाते में गया जिनकी सूची जिला प्रशासन ने तैयार करके आपदा प्रबंधन विभाग को भेजी थी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सभी जिलाधिकारियों से यह भी कहा है कि जो पात्र परिवार छूट गए हैं, उन्हें पहचानकर मदद दी जाए।

इस साल अब तक कितना पैसा बँटा

राज्य के 15 जिलों की 49 लाख से ज़्यादा आबादी इस बार बाढ़ की चपेट में आई। 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतें प्रभावित हुईं। पैसा अब तक दो किस्तों में भेजा गया है:

  • पहला चरण (15 सितंबर 2026): 8,77,190 परिवारों को कुल ₹614.03 करोड़।
  • दूसरा चरण (12 अक्टूबर 2026): 1,60,201 परिवारों को ₹112.14 करोड़।
  • कुल: 10,37,391 परिवारों को ₹726.17 करोड़।

हर परिवार को ₹7,000 ही मिले हैं, न कम न ज़्यादा।

कौन-कौन से जिले प्रभावित रहे

पटना, वैशाली, सारण, भोजपुर, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, अरवल, मधेपुरा और पूर्णिया। अगर आपका गाँव इन जिलों में गंगा या दूसरी नदियों के किनारे है और पानी घर तक आया था, तो आपका नाम सूची में होना चाहिए।

बिहार बाढ़ राहत का स्टेटस कैसे चेक करें

सबसे भरोसेमंद तरीक़ा अपने बैंक खाते को देखना ही है, क्योंकि पैसा वहीं आता है। बाकी तरीक़े उसके बाद आते हैं।

1. बैंक खाते से देखें

  • बैंक से जो मोबाइल नंबर जुड़ा है, उस पर आया SMS देखें। डीबीटी का पैसा आने पर आमतौर पर मैसेज आ जाता है।
  • मोबाइल बैंकिंग या बैंक का ऐप खोलकर मिनी स्टेटमेंट निकालें।
  • ऐप नहीं चलाते तो नज़दीकी बैंक शाखा या CSP (ग्राहक सेवा केंद्र) पर पासबुक अपडेट करा लें।

2. PFMS से पेमेंट देखें

सरकारी भुगतान ट्रैक करने के लिए PFMS की वेबसाइट पर Know Your Payment वाला विकल्प मिलता है। वहाँ अपने बैंक का नाम और खाता नंबर डालें, कैप्चा भरें और OTP मँगाएँ। भुगतान हुआ होगा तो तारीख़ और रकम के साथ दिख जाएगा। ध्यान रहे, OTP सिर्फ़ उसी वेबसाइट पर डालें जिसे आपने खुद खोला हो, किसी के फ़ोन करने पर कभी नहीं।

3. आपदा प्रबंधन विभाग का पोर्टल

बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग का पोर्टल aapda.bihar.gov.in है। कुछ जानकारी स्रोतों में बताया गया है कि वहाँ लॉगिन करके Application Status का विकल्प खुलता है, जहाँ माँगी गई जानकारी भरकर Search दबाने पर स्थिति दिख जाती है। पोर्टल का ढाँचा समय-समय पर बदलता रहता है, इसलिए मेन्यू थोड़ा अलग दिखे तो घबराएँ नहीं।

4. अंचल या प्रखंड कार्यालय में पूछें

सूची जिला प्रशासन बनाता है, इसलिए आपके परिवार का नाम उसमें है या नहीं, यह सबसे पक्के तौर पर अंचल कार्यालय या प्रखंड कार्यालय में ही पता चलता है। जाते समय आधार कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी और मोबाइल नंबर साथ रखें।

पैसा न आए तो क्या करें

पैसा न आने की वजहें ज़्यादातर छोटी निकलती हैं। एक-एक करके जाँच लें:

  • नाम सूची में नहीं है। सबसे आम कारण यही है। अंचल अधिकारी या प्रखंड विकास पदाधिकारी से लिखित में आवेदन देकर नाम जुड़वाने की माँग करें। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिलाधिकारी छूटे हुए परिवारों की जाँच कर रहे हैं।
  • खाता आधार से लिंक नहीं है। डीबीटी का पैसा आधार से जुड़े खाते में ही जाता है। बैंक जाकर आधार सीडिंग की स्थिति पूछ लें।
  • खाते की जानकारी गलत है। खाता नंबर या IFSC में एक अंक भी गलत हो तो पैसा लौट सकता है। पासबुक से मिलान करा लें।
  • खाता बंद या निष्क्रिय है। बहुत पुराना खाता हो तो बैंक से उसे चालू कराएँ।
  • अभी बारी नहीं आई। पहला चरण 15 सितंबर को और दूसरा 12 अक्टूबर को गया। जिनके नाम बाद में जुड़ेंगे, उन्हें अगले चरण में पैसा मिल सकता है। हमें अगले चरण की तारीख़ की कोई घोषणा नहीं मिली, इसलिए ताज़ा खबर पर नज़र रखें।

कौन पात्र माना जाता है

आम तौर पर वही परिवार, जो बिहार के निवासी हों, बाढ़ से प्रभावित इलाक़े में रहते हों और जिनका बैंक खाता आधार से जुड़ा हो। असली फ़ैसला सूची बनाते समय जिला प्रशासन की जाँच के आधार पर होता है, इसलिए कागज़ी पात्रता से ज़्यादा मायने रखता है कि आपके परिवार का नाम सर्वे में दर्ज हुआ या नहीं।

फसल नुकसान का पैसा अलग है

कई लोग ₹7,000 वाली मदद और फसल क्षति का अनुदान एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग हैं। फसल के नुकसान के लिए कृषि विभाग कृषि इनपुट अनुदान देता है। 14 अक्टूबर 2026 को 2.48 लाख से ज़्यादा किसानों के खाते में लगभग ₹112.52 करोड़ भेजे गए। मुख्यमंत्री के बताए अनुसार इस अनुदान की दर असिंचित क्षेत्र में लगभग ₹8,500, सिंचित क्षेत्र में लगभग ₹17,000 और बहुवर्षीय फसलों में लगभग ₹22,000 प्रति हेक्टेयर है। कुल 4.57 लाख आवेदन आए थे, यानी बहुत से किसानों का पैसा अभी बाकी है। अगर आप किसान हैं तो अपने प्रखंड कृषि कार्यालय में आवेदन की स्थिति पूछें।

इन बातों से सावधान रहें

  • कोई फ़ोन करके OTP, UPI पिन या बैंक का पासवर्ड माँगे तो बिल्कुल न दें। सरकारी राहत के लिए ऐसी जानकारी कोई नहीं माँगता।
  • नाम जुड़वाने या पैसा निकलवाने के नाम पर रिश्वत माँगने वालों की शिकायत जिलाधिकारी या प्रखंड स्तर के अधिकारी से करें।
  • व्हाट्सऐप पर आने वाले अनजान लिंक पर क्लिक करके स्टेटस चेक न करें। हमेशा सरकारी वेबसाइट खुद टाइप करके खोलें।

एक नज़र में पूरी जानकारी

बिंदुजानकारी
योजना का नामबिहार बाढ़ राहत सहायता योजना
विभागआपदा प्रबंधन विभाग, बिहार सरकार
सहायता राशि₹7,000 प्रति परिवार (पहले ₹6,000)
पैसा कैसे मिलता हैडीबीटी से सीधे बैंक खाते में
पहला चरण15 सितंबर 2026, 8,77,190 परिवार, ₹614.03 करोड़
दूसरा चरण12 अक्टूबर 2026, 1,60,201 परिवार, ₹112.14 करोड़
अब तक कुल10,37,391 परिवार, ₹726.17 करोड़
प्रभावित जिले15 जिले, 88 प्रखंड, 575 पंचायतें
स्टेटस देखने के तरीक़ेबैंक SMS या पासबुक, PFMS, आपदा पोर्टल, अंचल कार्यालय
पोर्टलaapda.bihar.gov.in

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